भोपाल जिले की सात विधानसभा सीटों में से एक महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र, बैरसिया तहसील आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है। यहां का बस स्टैंड यात्री



 प्रतीक्षालय इसकी बदहाली की जीती-जागती मिसाल है। कभी नगर पालिका परिषद का कार्यालय रहे इस भवन का लोकार्पण करीब 35 से 40 साल पहले देश के स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई और स्वर्गीय पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने किया था। तब शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि आने वाले वर्षों में यह भवन हादसों को दावत देगा। यह बस स्टैंड बैरसिया तहसील के हज़ारों लोगों को भोपाल, गुना, राजगढ़, सिरोंज, विदिशा जैसे शहरों से जोड़ता है। रेलवे लाइन न होने के कारण यह बस स्टैंड ही लोगों का एकमात्र सहारा है। लेकिन अब यह प्रतीक्षालय खुद यात्रियों के लिए खतरा बन गया है। बारिश के मौसम में टपकती छत, जगह-जगह दरारें, दीवारों में उगे विशालकाय पीपल के पेड़ - सब इस इमारत की दुर्दशा बयां करते हैं। एक साल पहले इसी प्रतीक्षालय का एक हिस्सा टूट कर एक बुजुर्ग महिला पर गिरा था। -गनीमत रही कि बड़ी दुर्घटना टल गई। लेकिन सवाल है अगली बार कितनी जानें जाएंगी? बैरसिया तहसील के हज़ारों यात्रियों का सवाल क्या उनकी जान की कीमत इतनी सस्ती है कि हादसा होने का इंतज़ार किया जा रहा है? अब देखना यह है कि जिम्मेदार कब जागेंगे या फिर कोई बड़ा हादसा ही प्रशासन को जगा पाएगा। 

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